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بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلضُّحَىٰ ۝١

साक्षी है चढ़ता दिन,

وَٱلَّيْلِ إِذَا سَجَىٰ ۝٢

और रात जबकि उसका सन्नाटा छा जाए

مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلَىٰ ۝۳

तुम्हारे रब ने तुम्हें न तो विदा किया और न वह बेज़ार (अप्रसन्न) हुआ

وَلَلْءَاخِرَةُ خَيْرٌۭ لَّكَ مِنَ ٱلْأُولَىٰ ۝٤

और निश्चय ही बाद में आनेवाली (अवधि) तुम्हारे लिए पहलेवाली से उत्तम है

وَلَسَوْفَ يُعْطِيكَ رَبُّكَ فَتَرْضَىٰٓ ۝٥

और शीघ्र ही तुम्हारा रब तुम्हें प्रदान करेगा कि तुम प्रसन्न हो जाओगे

أَلَمْ يَجِدْكَ يَتِيمًۭا فَـَٔاوَىٰ ۝٦

क्या ऐसा नहीं कि उसने तुम्हें अनाथ पाया तो ठिकाना दिया?

وَوَجَدَكَ ضَآلًّۭا فَهَدَىٰ ۝۷

और तुम्हें मार्ग से अपरिचित पाया तो मार्ग दिखाया?

وَوَجَدَكَ عَآئِلًۭا فَأَغْنَىٰ ۝۸

और तुम्हें निर्धन पाया तो समृद्ध कर दिया?

فَأَمَّا ٱلْيَتِيمَ فَلَا تَقْهَرْ ۝۹

अतः जो अनाथ हो उसे मत दबाना,

وَأَمَّا ٱلسَّآئِلَ فَلَا تَنْهَرْ ۝١۰

और जो माँगता हो उसे न झिझकना,

وَأَمَّا بِنِعْمَةِ رَبِّكَ فَحَدِّثْ ۝١١

और जो तुम्हें रब की अनुकम्पा है, उसे बयान करते रहो