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surah001
Al-Faatiha (1)
The Opening, makkah, 7 verses.
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بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ ١
अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपालु और अत्यन्त दयावान हैं।
ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلْعَٰلَمِينَ ٢
प्रशंसा अल्लाह ही के लिए हैं जो सारे संसार का रब हैं
ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ ۳
बड़ा कृपालु, अत्यन्त दयावान हैं
مَٰلِكِ يَوْمِ ٱلدِّينِ ٤
बदला दिए जाने के दिन का मालिक हैं
إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ ٥
हम तेरी बन्दगी करते हैं और तुझी से मदद माँगते हैं
ٱهْدِنَا ٱلصِّرَٰطَ ٱلْمُسْتَقِيمَ ٦
हमें सीधे मार्ग पर चला
صِرَٰطَ ٱلَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ غَيْرِ ٱلْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا ٱلضَّآلِّينَ ۷
उन लोगों के मार्ग पर जो तेरे कृपापात्र हुए, जो न प्रकोप के भागी हुए और न पथभ्रष्ट